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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-95

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा, लागि देखि सुन्दर फल रुखा, सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी, परम सुभट रजनीचर भारी…..!! भावार्थ:- हे माता ! सुनो, सुंदर फल वाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग...

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शिक्षा का निचोड़

शिक्षा का निचोड़ काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा - "गुरुवर! शिक्षा का निचोड़ क्या है?....संत ने मुस्करा कर कहा - "एक दिन तुम स्वयं जान जाओगे।"…कुछ समय...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जीवन में कितनी भी विपत्ती आये अपना संयम रखना चाहिए क्योंकि कैसी भी विपत्ती हो सामना आपको ही करना है…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-94

जय श्री राधे कृष्ण ……. "बार बार नाएसि पद सीसा, बोला बचन जोरि कर कीसा, अब कृतकृत्य भयउँ मैं माता, आसिस तव अमोघ बिख्याता…..!! भावार्थ:- हनुमान जी ने बार-बार सीता जी के चरणों में सिर नवाया और फिर हाथ जोड़...

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खरगोश और लोमड़ी- सर्टिफिकेट

खरगोश और लोमड़ी- सर्टिफिकेट एक दिन जंगल में एक लोमड़ी ने एक खरगोश को पकड़ लिया। वह उसे खाने ही जा रही रही थी, सुबह का नाश्ता ही करने की तैयारी थी की खरगोश ने कहा, “रुको”! तुम लोमड़ी हो,...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-93

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अजर अमर गुणनिधि सुत होहू, करहुँ बहुत रघुनायक छोहू, करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना, निर्भर प्रेम मगन हनुमाना….!! भावार्थ:- हे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापे से रहित ), अमर और गुणों के खजाने होओ। श्री...

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रावण विद्वान था जबकि हनुमान जी, विद्यावान थे

रावण विद्वान था जबकि हनुमान जी, विद्यावान थे "विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥" एक होता है विद्वान और एक विद्यावान । दोनों में आपस में बहुत अन्तर है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं, रावण विद्वान...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-92

जय श्री राधे कृष्ण ……. "मन सन्तोष सुनत कपि बानी, भगति प्रताप तेज बल सानी, आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना, होहु तात बल सील निधाना…..!! भावार्थ:- भक्ति, प्रताप, तेज और बल से सनी हुई हनुमान जी की वाणी सुन कर सीता...

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निर्धन का सम्मान

निर्धन का सम्मान एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके सामने प्रकट...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-91

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सीता मन भरोस तब भयऊ, पुनि लघु रुप पवनसुत लयऊ…..!! भावार्थ:- तब (उसे देखकर) सीता जी के मन में विश्वास हुआ। हनुमान जी ने फिर छोटा रुप धारण कर लिया….!! सुनु माता साखामृग नहिं बल...

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