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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-184

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जासु सकल मंगलमय कीती, तासु पयान सगुन यह नीती, प्रभु पयान जाना बैदेहीं, फरकि बाम अंग जनु कहि देहीं ।। भावार्थ:- जिन की कीर्ति सब मंगलों से परिपूर्ण है, उन के प्रस्थान के समय शकुन...

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सीनियर सिटीजन शादीलाल जी की समस्या

सीनियर सिटीजन शादीलाल जी की समस्या कल 90 वर्षीय शादीलाल जी वॉयलेट लाइन मेट्रो में अकेले सफर करते मिले। सीनियर सिटीजन की सीट पर उनके बगल में बैठने के बाद मुझे लगा वो कुछ बेचैन हैं। बार बार वे मुझसे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-183

जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम कृपा बल पाइ कपिंदा, भए पच्छजुत मनहुँ गिरिन्दा, हरषि राम तब कीन्ह पयाना, सगुन भए सुंदर सुभ नाना ।। भावार्थ:- राम कृपा का बल पा कर श्रेष्ठ वानर मानो पंख वाले बड़े पर्वत हो...

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भक्त और भगवान

भक्त और भगवान एक बार संत सूरदास जी को एक सज्जन ने भजन के लिए आमंत्रित किया। भजनोपरांत सज्जन को उन्हें घर तक पहुंचाने का ध्यान ही नहीं रहा। सूरदास जी ने भी उसे तकलीफ नहीं देनी चाही और खुद...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-182

जय श्री राधे कृष्ण ……. "प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा, गर्जहिं भालु महाबल कीसा, देखी राम सकल कपि सेना, चितइ कृपा करि राजिव नयना ।। भावार्थ:- वे प्रभु के चरण कमलों में सिर नवाते हैं । महान बलवान रीछ और...

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शिक्षा का असर

शिक्षा का असर एक दिन की घटना है कि विघालय के प्रधानाध्यापक विद्यालय में पहुंचे थे कि तभी एक बालिका एक सोने का झुमका लेकर आयी और कहा कि मुझे यह झुमका विद्यालय आते समय रास्ते मे पडा मिला। हम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-181

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कपिपति बेगि बोलाए आए जूथप जूथ, नाना बरन अतुल बल बानर भालु बरुथ ।। भावार्थ:- वानर राज सुग्रीव ने शीघ्र ही वानरों को बुलाया, सेनापतियों के समूह आ गये । वानर - भालुओं के झुंड...

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तीर्थ विशेष (यमुनोत्री धाम, उत्तराखंड)

तीर्थ विशेष (यमुनोत्री धाम, उत्तराखंड) देवभूमि के पश्चिमी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित यमनोत्री धाम, माँ गंगा के समकक्ष पवित्र माने जाने वाली यमुना जी की पावन उद्गम स्थली है….यह स्थान उत्तराखंड के बर्फ से ढँके श्रंग बंदरपुच्‍छ के समीप कालिंदी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-180

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अब बिलंबु केहि कारन कीजे, तुरत कपिन्ह कहुँ आयसु दीजे, कौतुक देखि सुमन बहु बरषी, नभ तें भवन चले सुर हरषी ।। भावार्थ:- अब विलंब किस कारण किया जाए ? वानरों को तुरंत आज्ञा दो...

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पुण्य तपोबाल एकत्रित करो

पुन्य तपोबल एकत्रित करो एक सेठ के एक इकलौता पुत्र था पर छोटी सी उम्र मे ही गलत संगत के कारण राह भटक गया! चिंतित सेठ को कुछ नही सूझ रहा था। तो वो भगवान् के मन्दिर में गया और...

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