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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-174

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कहु कपि रावन पालित लंका, केहि बिधि दहेउ दुर्ग अति बंका, प्रभु प्रसन्न जाना हनुमाना,बोला बचन बिगत अभिमाना ।। भावार्थ:- हे हनुमान ! बताओ तो, रावण के द्वारा सुरक्षित लंका और उस के बड़े बाँके...

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सूर्य और गुफा

सूर्य और गुफाएक दिन सूरज और एक गुफा में बातचीत हुई। सूरज को "अंधेरे" का मतलब समझने में परेशानी हो रही थी और गुफा को "प्रकाश" और "स्पष्टता" का मतलब समझ नहीं आ रहा था, इसलिए उन्होंने अपने स्थान परस्पर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-173

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सावधान मन करि पुनि संकर, लागे कहन कथा अति सुंदर, कपि उठाई प्रभु हृदयँ लगावा, कर गहि परम निकट बैठावा ।। भावार्थ:- फिर मन को सावधान कर के शंकर जी अत्यंत सुंदर कथा कहने लगे...

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मनुष्य की कीमत

मनुष्य की कीमतलोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पूछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”……पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-172

जय श्री राधे कृष्ण ……. "बार बार प्रभु चहइ उठावा, प्रेम मगन तेहि उठब न भावा, प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा, सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा ।। भावार्थ:- प्रभु उनको बार - बार उठाना चाहते हैं, परन्तु प्रेम में...

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व्यक्तित्व

व्यक्तित्वरूमाल लगा कर अपने मुंह से सांस देने लगे। कुछ मिनट तक सी.पी.आर. देने के बाद मैंने देखा कि रोगी सहयात्री का तड़फना कम हो गया। जगमोहन राव जी ने अपने सूटकेस में से कुछ और गोलियां निकालीं और परिवार...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-171

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत, चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत ।। भावार्थ:- प्रभु के वचन सुनकर और उनके (प्रसन्न) मुख तथा (पुलकित) अंगों को देख कर हनुमान जी हर्षित हो गये...

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खुशबू की कीमत

खुशबू की कीमत सालों पहले एक भिखारी नंदा नगरी में भूख से तड़पने के कारण खाने के लिए कुछ मांग रहा था। तभी उसे एक व्यक्ति कुछ रोटियां दे देता है। अब भिखारी रोटी के लिए सब्जी की तलाश में...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-170

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं, देखेउँ करि बिचार मन माहीं, पुनि पुनि कपिहि चितव सुरत्राता, लोचन नीर पुलक अति गाता ।। भावार्थ:- हे पुत्र! सुन, मैंने मन में (खूब) विचार कर के देख लिया...

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ताई

ताई मैंने ताई के घर की तरफ देखा। ताई नहीं थी। मैंने चैन की सांस ली। जब कभी मुझे बाहर निकलते देखती हैं। उन्हें कुछ ना कुछ बाजार से मंगाना ही होता है। कभी सब्जी, कभी दवा तो कभी दूध।...

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