सुविचार-सुन्दरकाण्ड-22
जय श्री राधे कृष्ण ……. पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार, अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार….!! भावार्थ:- नगर के बहुसंख्यक रख वालों को देखकर हनुमान जी ने मन में विचार किया कि अत्यंत छोटा रूप,...
जय श्री राधे कृष्ण ……. पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार, अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार….!! भावार्थ:- नगर के बहुसंख्यक रख वालों को देखकर हनुमान जी ने मन में विचार किया कि अत्यंत छोटा रूप,...
एक बंधन ऐसा भी अनुज नाम था उसका....मेरे आफिस में थर्ड ग्रेड वर्कर था....मेरा तबादला अभी यहाँ हुआ था आफिसर की पोस्ट पर मैने तीन चार दिन पहले ही जाईन करा था....!!! अनुज बहुत मेहनती व समझदार था मुझे तो...
जय श्री राधे कृष्ण ……. " मुट्ठी दुआओं की माता-पिता ने चुपके से सिर पर छोड़ दी….खुश रहो… कहकर और हम, नासमझ, जिंदगी भर मुक़द्दर का अहसान मानते रहे…..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं, कहुँ महिष मानुष धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं, एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही, रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति...
संत की शरण एक गांव में एक ठाकुर थे। उनके यहां एक नौकर काम करता था.. जिसके कुटुंब में बीमारी की वजह से कोई आदमी नहीं बचा। केवल नौकर का लड़का रह गया। वह ठाकुर के घर काम करने लग...
जय श्री राधे कृष्ण ……. बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं, नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रुप मुनि मन मोहहीं , कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं, नाना अखारेन्ह भिरहिं बहुबिधि एक एकन्ह तर्जहीं…..!! भावार्थ:- वन...
भगवान् किसके दास होते हैं? वृन्दावन में एक भक्त को बिहारी जी के दर्शन नहीं हुए। लोग कहते कि अरे! बिहारीजी सामने ही तो खड़े हैं। पर वह कहता कि भाई! मेरे को तो नहीं दीख रहे! इस तरह तीन...
जय श्री राधे कृष्ण ……. कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुन्दरायतना घना , चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना, गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै, बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै…..!! भावार्थ:-...
ससुराल की रीति एक लड़की विवाह करके ससुराल में आयी। घर में एक तो उसका पति था, एक सास थी और एक दादी सास थी। वहाँ आकर उस लड़की ने देखा कि दादी सास का बड़ा अपमान, तिरस्कार हो रहा...
जय श्री राधे कृष्ण ……. अति उतंग जलनिधि चहु पासा, कनक कोट कर परम प्रकासा……!! भावार्थ:- वह अत्यंत ऊंचा है। उसके चारों ओर समुद्र हैं । सोने के परकोटे (चहारदीवारी) का परम प्रकाश हो रहा है…..!! सुप्रभात आज का दिन...