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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-17-A

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जय श्री राधे कृष्ण …….

अति उतंग जलनिधि चहु पासा, कनक कोट कर परम प्रकासा……!!

भावार्थ:- वह अत्यंत ऊंचा है। उसके चारों ओर समुद्र हैं । सोने के परकोटे (चहारदीवारी) का परम प्रकाश हो रहा है…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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