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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-199

जय श्री राधे कृष्ण ……. "बैठेउ सभा खबरि असि पाई, सिंधु पार सेना सब आई, बूझेसि सचिव उचित मत कहहू, ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ।। भावार्थ:- ज्यों ही वह सभा में जा कर बैठा, उस ने ऐसी खबर...

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28 दिन का PG

28 दिन का PG( पेइंग गेस्ट )आंटी जी ……., जयपुर में एक PG ( पेइंग गेस्ट ) रखती हैं। उनका अपना पुश्तैनी घर है, उसमे बड़े बड़े 10 - 12 कमरे हैं। उन्हीं कमरों में हर एक मे 3 bed...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-198

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अस कहि बिहसि ताहि उर लाई, चलेउ सभा ममता अधिकाई, मंदोदरी हृदयँ कर चिंता, भयउ क़ंत पर बिधि बिपरीता ।। भावार्थ:- रावण ने ऐसा कह कर हँस कर उसे हृदय से लगा लिया और ममता...

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खुशी…

खुशी... तुर्की के एक प्रसिद्ध कवि ने अपने नामचीन चित्रकार मित्र से अनुरोध किया वह 'खुशी' पर एक पेन्टिंग बनायें। लिहाजा,चित्रकार ने एक चरमराये बिस्तर पर मधुर नींद सोये एक परिवार की पेन्टिंग बनायी। उस बिस्तर का एक पाया भी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-197

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं आवइ मर्कट कटकाई, जिअहिं बिचारे निसिचर खाई, कंपहिं लोकप जाकीं त्रासा, तासु नारि सभीत बड़ि हासा ।। भावार्थ:- यदि वानरों की सेना आवेगी तो बेचारे राक्षस उसे खा कर अपना जीवन निर्वाह करेंगे ।...

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निष्काम प्रेम ही सच्ची भक्ति है

निष्काम प्रेम ही सच्ची भक्ति है एक गाँव में एक बूढ़ी माई रहती थी । माई का आगे – पीछे कोई नहीं था इसलिए बूढ़ी माई बिचारी अकेली रहती थी । एक दिन उस गाँव में एक साधू आया ।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-196

जय श्री राधे कृष्ण ……. "श्रवन सुनी सठ ता करि बानी, बिहसा जगत बिदित अभिमानी, सभय सुभाउ नारि कर साचा, मंगल महुँ भय मन अति काचा ।। भावार्थ:- मूर्ख और जगत प्रसिद्ध अभिमानी रावण कानों से उसकी वाणी सुन कर...

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अपनी गठरी टटोलें

अपनी गठरी टटोलें दो आदमी यात्रा पर निकले! दोनों की मुलाकात हुई, दोनों का गंतव्य एक था तो दोनों यात्रा में साथ हो चले... सात दिन बाद दोनों के अलग होने का समय आया तो एक ने कहा:-भाई साहब !...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-195

जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम बान अहिगन सरिस, निकर निसाचर भेक, जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक ।। भावार्थ:- श्री राम जी के बाण सर्पो के समूह के समान हैं और राक्षसों के समूह मेंढक...

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कंपकपाते हाथ बेटे को आशीर्वाद

कंपकपाते हाथ बेटे को आशीर्वाद जल्दी जल्दी नींद में बिस्तर पर छूट गयी पेशाब को मनोहर जी साफ करने में लगे थे कि कहीं बहू बेटा ना देख ले.... कल ही तो बहू काजल ने दूसरी चादर बिछायी थी.... कितना...

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