lalittripathi@rediffmail.com

Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
2545 posts
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Stories

मेरा ग़म कितना कम है

मेरा ग़म कितना कम है तत्काल सर्जरी के लिए बुलाए जाने के बाद एक डॉक्टर साहब आनन-फानन में अस्पताल में दाखिल हुए। उन्होंने जल्द से जल्द कॉल का जवाब दिया, अपने कपड़े बदले और सीधे सर्जरी ब्लॉक में चले गए।...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-30

जय श्री राधे कृष्ण ……. *मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा, देखे जह तह अगनित जोधा, गयउ दसानन मंदिर माहीं, अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं…….!! भावार्थ:- उन्होंने एक-एक (प्रत्येक) महल की खोज की । जहां-तहां असंख्य योद्धा देखे । फिर...

Stories

महादानी सूर्यपुत्र कर्ण की मृत्यु का रहस्य

महादानी सूर्यपुत्र कर्ण की मृत्यु का रहस्य दुशाशन को जब भीम ने मार कर उसका रक्त पिया और द्रौपदी के केश उसके खून से धुलवाए तो दुर्योधन की आँखों में खून उतर आया उसने आव देखा न ताव, कर्ण को...

Quotes

सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण "जीवन ना तो भविष्य में है और ना ही अतीत में है….जीवन तो केवल इस पल में है., इसी पल का अनुभव ही जीवन है."…..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो....

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-29

जय श्री राधे कृष्ण ……. गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही, राम कृपा करि चितवा जाही, अति लघु रूप धरेउ हनुमाना, पैठा नगर सुमिरि भगवाना….!! भावार्थ:- और हे गरुड़ जी ! सुमेरु पर्वत उसके लिए रज के समान हो जाता है,...

Stories

भ्रम त्याग प्राणी

भ्रम त्याग प्राणी एक बार कागज हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा।पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई…..यहाँ कैसे पधारे, कागज ने कहा-अपने दम पर…..जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा तभी हवा...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-28

जय श्री राधे कृष्ण ……. प्रबिसि नगर कीजे सब काजा, हृदयँ राखि कोसलपुर राजा, गरल सुधा रिपु करहिं मिताई, गोपद सिंधु अनल सितलाई…..!! भावार्थ:- अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथ जी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश करके सब...

Stories

मिट्टी का प्रभाव

मिट्टी का प्रभाव    जिस भूमि मेँ जैसे कर्म किए जाते हैँ, वैसे ही संस्कार वह भूमि भी प्राप्त कर लेती है। इसलिए गृहस्थ को अपना घर सदैव पवित्र रखना चाहिए। मार्कण्डेय पुराण मेँ एक कथा आती है- राम लक्ष्मण सीता...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-27

जय श्री राधे कृष्ण ……. तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग, तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग……!! भावार्थ:- हे तात ! स्वर्ग और मोक्ष के सब सुखों को तराजू के एक पलड़े में रखा जाय,...

1 160 161 162 255
Page 161 of 255