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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-269

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत बिहसि बोले रघुबीरा, ऐसहिं करब धरहु मन धीरा, अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई, सिंधु समीप गए रघुराई ।। भावार्थ:- यह सुन कर श्री रघुवीर हँस कर बोले - ऐसे ही करेंगे, मन में धीरज...

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स्वामी जी का उपदेश

स्वामी जी का उपदेश एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा,...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-268

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ दैव कर कवन भरोसा, सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा, कादर मन कहुँ एक अधारा, दैव दैव आलसी पुकारा ।। भावार्थ:- (लक्ष्मण जी ने कहा) हे नाथ ! दैव का कौन भरोसा ! मन में...

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मन मैला तन को धोये

मन मैला और तन को धोएं कुंभ स्नान चल रहा था। राम घाट पर भारी भीड़ लगी थी। शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती जी ने इतनी भीड़ का कारण पूछा -आशुतोष ने कहा - कुम्भ पर्व पर स्नान करने...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-267

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सखा कही तुम्ह नीकि उपाई, करिअ दैव जौं होइ सहाई, मंत्र न यह लछिमन मन भावा, राम बचन सुनि अति दुख पावा ।। भावार्थ:- (श्री राम जी ने कहा) हे सखा! तुमने अच्छा उपाय बताया...

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गोपी और कृष्ण की अनोखी कथा …

गोपी और कृष्ण की अनोखी कथा ... एक गोपी एक वृक्ष के नीचे ध्यान लगा बैठ जाती है। कान्हा को सदा ही शरारतें सूझती रहती हैँ। कान्हा कभी उस गोपी को कंकर मारकर छेड़ते हैं कभी उसकी चोटी खींच लेते...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-266

जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय बिचारि, बिनु प्रयास सागर तरिहि सकल भालु कपि धारि ।। भावार्थ:- हे प्रभु ! समुद्र आपके कुल में बड़े (पूर्वज) हैं, वे विचार कर उपाय बतला देंगे । तब...

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प्रेम भाव..

प्रेम भाव.. एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारे जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी मंदिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-265

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह लंकेस सुनहु रघुनायक, कोटि सिंधु सोषक तव सायक, जद्यपि तदपि नीति असि गाई, बिनय करिअ सागर सन जाई ।। भावार्थ:- विभीषण जी ने कहा - हे रघुनाथ जी! सुनिये, यद्यपि आपका एक बाण ही...

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भाग्यशाली पश्चाताप

भाग्यशाली पश्चाताप घर का सारा कचरा इकट्ठा किया और बड़बड़ाती हुई बाहर निकली- 'संगीत के नाम पर बस अब यही आवाज शेष रह गई है जीवन में, बीस दिन हो गए स्पीकर खराब हुए,पर यहां किसी को कोई फर्क ही...

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