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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-189

जय श्री राधे कृष्ण ……. "एहि बिधि जाइ कृपानिधि उतरे सागर तीर, जहं तहं लागे खान फल भालु बिपुल कपि बीर ।। भावार्थ:- इस प्रकार कृपा निधान श्री राम जी समुद्र तट पर जा उतरे । अनेकों रीछ - वानर...

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नौतपा

धार्मिक दृष्टि से जानें क्यों होती है नौतपा की शुरुआत? हिंदू धर्म में नौतपा को काफी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तब नौतपा प्रारंभ होता है. साल...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-188

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सहि सक न भार उदार अहिपति बार बारहिं मोहई, गह दसन पुनि पुनि कमठ पृष्ठ कठोर सो किमि सोहई, रघुबीर रुचिर प्रयान प्रस्थिति जानि परम सुहावनी, जनु कमठ खर्पर सर्पराज सो लिखत अबिचल पावनी ।।...

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पेइंग गेस्ट वाली माँ

पेइंग गेस्ट वाली माँवो चुपचाप पढ़ता रहता है, ज्यादा बातें नहीं करता। आगे का छोटा कमरा दे रखा है हमने। सुबह का नाश्ता कर के जाता है फिर कॉलेज और ट्यूशन करके एक ही बार शाम में आता है। रात...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-187

जय श्री राधे कृष्ण ……. "चिक्करहिं दिग्गज डोल महि गिरि लोल सागर खर भरे, मन हरष सभ गंधर्ब सुर मुनि नाग किंनर दुख टरे, कटकटहिं मर्कट बिकट भट बहु कोटि कोटिन्ह धावहीं, जय राम प्रबल प्रताप कोसलनाथ गुन गन गावहीं...

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जब तक जिंदा हूं तब तक घूमना चाहती हूं

जब तक जिंदा हूं तब तक घूमना चाहती हूं चेन्नई सफ़र के दौरान विजयवाड़ा में जब मेरे केबिन से सब उतर गए तो TTE ने कहा कि C केबिन में एक आंटी आपको बुला रहीं हैं। मैं वहां गया तो...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-186

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नख आयुध गिरि पादपधारी, चले गगन महि इच्छाचारी, केहरिनाद भालु कपि करहीं, डगमगाहिं दिग्गज चिक्करहीं ।। भावार्थ:- नख ही जिनके शस्त्र हैं, वे इच्छानुसार (सर्वत्र बेरोक - टोक) चलने वाले रीछ - वानर पर्वतों और...

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सबसे कीमती भाव

सबसे कीमती भाव एक बार किसी गांव में महात्मा बुध्द का आगमन हुआ। सब इस होड़ में लग गये कि क्या भेंट करें ! इधर गाँव में एक गरीब मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-185

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई, असगुन भयउ रावनहि सोई, चला कटकु को बरनैं पारा, गर्जहिं बानर भालु अपारा ।। भावार्थ:- जानकी जी को जो - जो शकुन होते थे, वही - वही रावण के लिए...

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वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम वृद्धाश्रम के दरवाजे पर रोज एक कार आकर लगती थी। उस कार में से एक नौजवान उतरता और एक बुढ़ी महिला के पास जाकर बैठ जाता। एक आध घंटे तक दोनों के बीच कुछ वार्तालाप चलती फिर वह उठकर...

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