वाल्मीकि रामायण -भाग 58
वाल्मीकि रामायण -भाग 58विभीषण की कड़वी बातें सुनकर इन्द्रजीत को बड़ा क्रोध आया। वह अपने रथ को आगे बढ़ाकर तुरंत सामने आ खड़ा हुआ। उसने अपने हाथों में धनुष-बाण उठा लिया था और उसका खड्ग एवं अन्य आयुध भी वहीं...
वाल्मीकि रामायण -भाग 58विभीषण की कड़वी बातें सुनकर इन्द्रजीत को बड़ा क्रोध आया। वह अपने रथ को आगे बढ़ाकर तुरंत सामने आ खड़ा हुआ। उसने अपने हाथों में धनुष-बाण उठा लिया था और उसका खड्ग एवं अन्य आयुध भी वहीं...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " "दूसरों की बातें सुनकर अपने रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए क्यूँकि रिश्ते अपने होते है दूसरों के नही…….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
वाल्मीकि रामायण -भाग 57 यह सुनकर श्रीराम जोर-जोर से हँसते हुए बोले, “निशाचर! क्यों व्यर्थ डींग हाँकता है? दण्डकारण्य में जब मैंने तेरे पिता खर के साथ ही त्रिशिरा, दूषण व अन्य चौदह हजार राक्षसों का वध किया था, तो...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " "सुबह का एक छोटा सा सकारात्मक विचार हमारा पूरा दिन शानदार बना सकता है…..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
वाल्मीकि रामायण -भाग 56 तत्पश्चात उन्होंने श्रेष्ठ कैलास पर्वत, शिवजी के वाहन वृषभ तथा श्रेष्ठ ऋषभ पर्वत को भी देखा। इसके बाद उनकी दृष्टि उस उत्तम पर्वत पर पड़ी, जो सब प्रकार की औषधियों से चमक रहा था। वहाँ पहुँचकर...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " "हमारी अच्छाइयां,बेशक अदृश्य हो सकती हैं,लेकिन इनकी छाप सदैव ,दूसरों के हृदय में विराजमान रहती हैं……!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
वाल्मीकि रामायण -भाग 55देवान्तक के मारे जाने से त्रिशिरा को बड़ा क्रोध हुआ और उसने नील पर अपने पैने बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। महोदर भी एक हाथी पर सवार होकर आ गया और उसने भी नील पर बाणों...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " "समस्या यह नही है कि, सच बोलने वाले कम हो रहे है, समस्या यह है कि, सिर्फ मर्जी का सच सुनने वालों की संख्या बढ़ रही है….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण...
वाल्मीकि रामायण -भाग 54द्विविद ने एक बड़ा पर्वत उठाकर कुम्भकर्ण की ओर फेंका। वह उस राक्षस तक नहीं पहुँचा, किन्तु उसकी सेना पर जाकर गिरा और उसने अनेक घोड़ों, हाथियों व राक्षसों को कुचल डाला। इससे कुपित होकर राक्षस-सेना के...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " "जीवन में क्रोध तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता तब पाप बन जाती है कि जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाए….!!...