lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-287

110Views

जय श्री राधे कृष्ण …..

कपि सब सुग्रीव समाना, इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना, राम कृपा अतुलित बल तिन्हहीं, तृन समान त्रैलोकहि गनहीं ।।

भावार्थ:– यह सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे (एक – दो नहीं) करोड़ों हैं, उन बहुत सों को गिन ही कौन सकता है ? श्री राम जी की कृपा से उनमें अतुलनीय बल है। वह तीनों लोकों को तृण के समान (तुच्छ) समझते हैं…. !!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply