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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-195

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जय श्री राधे कृष्ण …….

राम बान अहिगन सरिस, निकर निसाचर भेक, जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक ।।

भावार्थ:– श्री राम जी के बाण सर्पो के समूह के समान हैं और राक्षसों के समूह मेंढक के समान । जब तक वे इन्हें ग्रस नहीं लेते (निगल नही जाते) तब तक हठ छोड़ कर उपाय कर लीजिए…….!!

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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