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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-33

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जय श्री राधे कृष्ण …….

लंका निसिचर निकर निवासा, इहां कहां सज्जन कर बासा, मन महुँ तरक करै कपि लागा, तेहीं समय बिभीषनु जागा……!!!

भावार्थ:- लंका तो राक्षसों के समूह का निवास स्थान है । यहां सज्जन (साधु पुरुष) का निवास कहां। हनुमान जी मन में इस प्रकार तर्क करने लगे। उसी समय विभीषण जी जागे …!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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