शांति का मार्ग
जीवन की शांति का मार्ग सहनशीलता से होकर ही गुजरता है। किसी ने कटु वचन कहे तो सह लिया और किसी ने यथोचित सम्मान न दिया तो सह लिया। कभी हमारे मनोनुकूल कोई कार्य न हुआ तो सह लिया और कभी कहीं हमारी आलोचना भी होने लगी तो मौन धारण कर लिया, बस इसी का नाम सहनशीलता है।
सहनशीलता और समर्पण समाज में आपकी उपयोगिता और मूल्य दोनों को बढ़ा देते हैं।
जिस तरह एक जौहरी किसी मूल्यवान आभूषण के निर्माण से पहले स्वर्ण को अग्नि में तपाता है, पीटता है, लेकिन इतने आघातों को सहने के बावजूद भी स्वर्ण कभी विरोध नहीं करता इसी को समर्पण कहा जाता है। हमारी सहनशीलता एवं हमारे द्वारा किया गया समर्पण ही समाज में आपके जीवन को एक श्रेष्ठ, आदर्श एवं उदाहरण के रूप में प्रतिष्ठित कर देता है। जीवन की सत्यता यही है, कि जिसे सहना आ गया, उसे रहना आ गया।
जय श्री राम