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जय श्री राधे कृष्ण ……..
” *“जब हम *गेहूँ* का एक दाना बोते हैं, तो कुछ समय बाद वो हमें हजार दाने के रुप में वापिस मिलता है,कर्म का भी बिलकुल ऐसा ही है, अच्छे कर्मों का फल हमें ईश्वर भी ऐसे ही देते है“…!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर् हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

2 Comments

  • प्रारब्ध ले कर जीव संसार में आता है, अपने कर्मों को साथ ले कर जाता है।
    कर्मों को सँभालिये। कर्म में सावधान रहिये। प्रारब्ध फिर उन्हीं कर्मों के फलस्वरूप बनेगा।

    – सप्रेम_हरिस्मरण

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