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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-64

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनत बचन पद गहि समुझाएसि, प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि, निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी, अस कहि सो निज भवन सिधारी…..!! भावार्थ:- सीता जी के वचन सुन कर त्रिजटा ने चरण पकड़ कर उन्हें...

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फिर चौदह वर्ष बाद

फिर चौदह वर्ष बाद गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज, नमत जिनहिं सुर मुनि संकर अज।( श्रीरामचरितमानस ), मित्र !...

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