सुविचार-सुन्दरकाण्ड-198
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अस कहि बिहसि ताहि उर लाई, चलेउ सभा ममता अधिकाई, मंदोदरी हृदयँ कर चिंता, भयउ क़ंत पर बिधि बिपरीता ।। भावार्थ:- रावण ने ऐसा कह कर हँस कर उसे हृदय से लगा लिया और ममता...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अस कहि बिहसि ताहि उर लाई, चलेउ सभा ममता अधिकाई, मंदोदरी हृदयँ कर चिंता, भयउ क़ंत पर बिधि बिपरीता ।। भावार्थ:- रावण ने ऐसा कह कर हँस कर उसे हृदय से लगा लिया और ममता...
खुशी... तुर्की के एक प्रसिद्ध कवि ने अपने नामचीन चित्रकार मित्र से अनुरोध किया वह 'खुशी' पर एक पेन्टिंग बनायें।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं आवइ मर्कट कटकाई, जिअहिं बिचारे निसिचर खाई, कंपहिं लोकप जाकीं त्रासा, तासु नारि सभीत...
निष्काम प्रेम ही सच्ची भक्ति है एक गाँव में एक बूढ़ी माई रहती थी । माई का आगे – पीछे...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "श्रवन सुनी सठ ता करि बानी, बिहसा जगत बिदित अभिमानी, सभय सुभाउ नारि कर साचा,...
अपनी गठरी टटोलें दो आदमी यात्रा पर निकले! दोनों की मुलाकात हुई, दोनों का गंतव्य एक था तो दोनों यात्रा...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम बान अहिगन सरिस, निकर निसाचर भेक, जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु...
कंपकपाते हाथ बेटे को आशीर्वाद जल्दी जल्दी नींद में बिस्तर पर छूट गयी पेशाब को मनोहर जी साफ करने में...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "तव कुल कमल बिपिन दुखदाई, सीता सीत निसा सम आई, सुनहु नाथ सीता बिनु दीन्हें,...
कर्मजिस प्रकार कर्म जीवन का स्वभाव है। उसी प्रकार कर्म फल का भोग भी जीवन की अनिवार्यता है। मनुष्य जिस...