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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-253

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सब कै ममता ताग बटोरी, मम पद मनहि बांध बरि डोरी, समदरसी इच्छा कछु नाहीं, हरष सोक भय नहिं मन माहीं ।। भावार्थ:- इन सब के ममत्व रुपी तागों को बटोर कर और उन सब...

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एक एहसास

एक एहसास एक प्रेमी-युगल शादी से पहले काफी हँसी-मजाक और नोक-झोंक किया करते थे। शादी के बाद उनमें छोटी छोटी...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ….. "मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ, सुभ आचरनु कीन्ह नहिं काऊ, जासु रुप मुनि ध्यान न...

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