वाल्मीकि रामायण -भाग 32
वाल्मीकि रामायण -भाग 32 (यहाँ से किष्किन्धाकाण्ड आरंभ हो रहा है।) पम्पा सरोवर के तट पर पहुँचकर श्रीराम और लक्ष्मण ने सरोवर में स्नान किया। फिर सुग्रीव की खोज में दोनों आगे बढ़े। उस समय सुग्रीव भी पम्पा के निकट...
वाल्मीकि रामायण -भाग 32 (यहाँ से किष्किन्धाकाण्ड आरंभ हो रहा है।) पम्पा सरोवर के तट पर पहुँचकर श्रीराम और लक्ष्मण ने सरोवर में स्नान किया। फिर सुग्रीव की खोज में दोनों आगे बढ़े। उस समय सुग्रीव भी पम्पा के निकट...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "एहि सर मम उत्तर तट बासी, हतहु नाथ खल नर अघ रासी, सुनि कृपाल सागर...
वाल्मीकि रामायण -भाग 31 जटायु की यह दशा देखकर सीता विलाप करने लगीं और अपनी रक्षा के लिए पुनः राम-लक्ष्मण...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई, करिहउँ बल अनुमान सहाई, एहिं बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ,...
वाल्मीकि रामायण -भाग 30 दण्डकारण्य में पहुँचकर रावण और मारीच ने श्रीराम के आश्रम को देखा। तब मारीच का हाथ...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ नील नल कपि द्वौ भाई, लरिकाईं रिषि आसिष पाई, तिन्ह कें परस किएँ गिरि...
वाल्मीकि रामायण -भाग 29 मारीच के पूछने पर रावण ने अपना मंतव्य बताया, “तात मारीच! मैं इस समय बहुत दुःखी...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ, जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु...
वाल्मीकि रामायण -भाग 28 पंचवटी में जब शूर्पणखा ने देखा कि श्रीराम ने उन चौदह हजार राक्षसों के साथ-साथ खर,...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई, उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई, प्रभु आग्या अपेल श्रुति गाई,...