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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-315

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जय श्री राधे कृष्ण …..

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई, लरिकाईं रिषि आसिष पाई, तिन्ह कें परस किएँ गिरि भारे, तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे ।।

भावार्थ:– (समुद्र ने कहा), हे नाथ ! नील और नल दो वानर भाई हैं। उन्होंने लड़कपन में ऋषि से आशीर्वाद पाया था । उनके स्पर्श कर लेने मात्र से ही भारी-भारी पहाड़ भी आप के प्रताप से समुद्र पर तैर जाएँगे….!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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