श्री हनुमानजी और यम
श्री हनुमानजी और यम हनुमान जी की यम से मुठभेड़ तब होती है जब हनुमानजी माता सीता का पता लगाने के लिए लंका जाते हैं। माता सीता को खोज सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद हनुमानजी ने अशोक वाटिका में मेघनाथ...
श्री हनुमानजी और यम हनुमान जी की यम से मुठभेड़ तब होती है जब हनुमानजी माता सीता का पता लगाने के लिए लंका जाते हैं। माता सीता को खोज सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद हनुमानजी ने अशोक वाटिका में मेघनाथ...
सदैव अच्छा करो एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए प्रतिदिन भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी। वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती...
सूर्य और गुफाएक दिन सूरज और एक गुफा में बातचीत हुई। सूरज को "अंधेरे" का मतलब समझने में परेशानी हो रही थी और गुफा को "प्रकाश" और "स्पष्टता" का मतलब समझ नहीं आ रहा था, इसलिए उन्होंने अपने स्थान परस्पर...
मनुष्य की कीमतलोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पूछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”……पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा...
व्यक्तित्वरूमाल लगा कर अपने मुंह से सांस देने लगे। कुछ मिनट तक सी.पी.आर. देने के बाद मैंने देखा कि रोगी सहयात्री का तड़फना कम हो गया। जगमोहन राव जी ने अपने सूटकेस में से कुछ और गोलियां निकालीं और परिवार...
खुशबू की कीमत सालों पहले एक भिखारी नंदा नगरी में भूख से तड़पने के कारण खाने के लिए कुछ मांग रहा था। तभी उसे एक व्यक्ति कुछ रोटियां दे देता है। अब भिखारी रोटी के लिए सब्जी की तलाश में...
ताई मैंने ताई के घर की तरफ देखा। ताई नहीं थी। मैंने चैन की सांस ली। जब कभी मुझे बाहर निकलते देखती हैं। उन्हें कुछ ना कुछ बाजार से मंगाना ही होता है। कभी सब्जी, कभी दवा तो कभी दूध।...
परहित-सबसे बड़ा धर्म एक बार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन भ्रमण के लिए कहीं निकले थे तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षा मांगते देखा तो अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राह्मण को स्वर्ण...
भावुक प्रसंग -मीरा चरित्र जरूर पढ़ें मीरा को चित्तौड़ में आये कुछ मास बीत गये । गिरधर की रागसेवा नियमित चल रही है ।मीरा अपने कक्ष में बैठे गिरधरलाल की पोशाक पर मोती टाँक रही थी । कुछ ही दूरी...
सुखी जीवन का रहस्य पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते थे। उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा उसके जीवन के सुखी नहीं...