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संत हरिदास जी

सन्त हरिदास जी एक व्यक्ति एक बहुत कीमती इत्र लेकर आये थे क्योंकि उन्होंने सन्त श्री हरिदास जी महाराज और बांके बिहारी के बारे में सुना हुआ था। उनके मन में आया कि मैं बिहारी जी को ये इत्र भेंट...

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नियति

नियति ये नियति का खेल है। इस तस्वीर में परेशान,बेहाल और अनमना सा दिखने वाला ये हिन्दुस्तानी लड़का एक मशहूर अदाकारा के साथ जर्मनी की एक मेट्रो में बैठा है जिसे वह नहीं जानता। देखते देखते ये तस्वीर तेज़ी से...

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सुदामा सा मित्र

सुदामा सा मित्र   उस दिन रविवार था किंतु सुबह नौ बजे अर्जेंट बुलावे पर मुझे अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी के एम॰डी की कोठी पर जाना पड़ा था । लौटते समय रास्ते में पड़ने वाले मार्केट की एक बेकरी पर मैंने...

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अनूठा कैकेयी का राम प्रेम

अनूठा कैकेयी का राम प्रेम राजा दशरथ की तीसरी पत्नी कैकेयी भगवान राम से अपने बेटे भरत से भी ज्यादा प्रेम करती थीं। उन्हें राम से बहुत आशाएं थीं। जब कैकेयी ने भगवान राम से 14 वर्षों का वनवास मांगा...

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पाप बेचने वाली

पाप बेचने वाली एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये | वहाँ एक महिला बैठी मिली | उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी | कालिदास ने उस महिला से पूछा : ” क्या बेचरही हो ?“ महिला...

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करमावती

करमावती करमावती नाम की 60-65 वर्ष की महिला सीर गोवर्धनपुर में रहती थी। उसका बालक रविदास की दादी लखपती के साथ बहुत प्रेम था। दादी लखपती प्राय: अपने प्रिय पौत्र को लेकर उससे मिलने जाया करती थीं। करमावती स्वयं लखपती...

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नाम में क्या रखा है

नाम में क्या रखा है एक बार स्वामी विवेकानंद प्रवचन दे रहे थे। उनका विषय था - " भगवान की नाम की महिमा।" श्रोतागण भाव - विभोर होकर सुन रहे थे। तभी एक व्यक्ति खड़ा हुआ और बोला - "...

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संवेदना और स्वार्थ

संवेदना और स्वार्थ एक ब्राह्मण को विवाह के बहुत सालों बाद पुत्र हुआ! लेकिन कुछ वर्षों बाद बालक की असमय मृत्यु हो गई! ब्राह्मण शव लेकर श्मशान पहुंचा! वह मोहवश उसे दफना नहीं पा रहा था. उसे पुत्र प्राप्ति के...

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मिट्टी का दिया

मिट्टी का दीया काशी के पास गंगा किनारे एक छोटा-सा आश्रम था। वहाँ रहते थे गुरु वेदांतानंद। उनके पास शिष्यों की भीड़ नहीं थी, सिर्फ़ एक शिष्य था – गिरधारी लाल। गिरधारी लाल बहुत बुद्धिमान था, वेद-उपनिषद कंठस्थ कर लेता...

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वास्तविक सौंदर्य

वास्तविक सौंदर्य बाहर से रुपवान होना बड़ी बात नहीं है अपितु भीतर से गुणवान होना बहुत बड़ी बात है। केवल बाहरी सौंदर्य ही श्रीकृष्ण को श्रीकृष्ण नहीं बनाता अपितु  उनकी उदारता और उनकी कारुण्यता ही उन्हें सहज आकर्षक बनाती है।...

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