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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-185

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई, असगुन भयउ रावनहि सोई, चला कटकु को बरनैं पारा, गर्जहिं बानर भालु अपारा ।। भावार्थ:- जानकी जी को जो - जो शकुन होते थे, वही - वही रावण के लिए...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-184

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जासु सकल मंगलमय कीती, तासु पयान सगुन यह नीती, प्रभु पयान जाना बैदेहीं, फरकि बाम अंग जनु कहि देहीं ।। भावार्थ:- जिन की कीर्ति सब मंगलों से परिपूर्ण है, उन के प्रस्थान के समय शकुन...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-183

जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम कृपा बल पाइ कपिंदा, भए पच्छजुत मनहुँ गिरिन्दा, हरषि राम तब कीन्ह पयाना, सगुन भए सुंदर सुभ नाना ।। भावार्थ:- राम कृपा का बल पा कर श्रेष्ठ वानर मानो पंख वाले बड़े पर्वत हो...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-182

जय श्री राधे कृष्ण ……. "प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा, गर्जहिं भालु महाबल कीसा, देखी राम सकल कपि सेना, चितइ कृपा करि राजिव नयना ।। भावार्थ:- वे प्रभु के चरण कमलों में सिर नवाते हैं । महान बलवान रीछ और...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-180

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अब बिलंबु केहि कारन कीजे, तुरत कपिन्ह कहुँ आयसु दीजे, कौतुक देखि सुमन बहु बरषी, नभ तें भवन चले सुर हरषी ।। भावार्थ:- अब विलंब किस कारण किया जाए ? वानरों को तुरंत आज्ञा दो...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-179

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनि प्रभु बचन कहहिं कपि बृंदा, जय जय जय कृपाल सुखकंदा, तब रघुपति कपिपतिहि बोलावा, कहा चलैं कर करहु बनावा ।। भावार्थ:- प्रभु के वचन सुन वानर गण कहने लगे - कृपालु आनन्दकन्द श्री राम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-178

जय श्री राधे कृष्ण ……. "उमा राम सुभाउ जेहिं जाना, ताहि भजनु तजि भाव न आना, यह संबाद जासु उर आवा, रघुपति चरन भगति सोइ पावा ।। भावार्थ:- हे उमा! जिस ने श्री राम जी का स्वभाव जान लिया, उसे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-177

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ भगति अति सुखदायनी, देहु कृपा करि अनपायनी, सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी, एवमस्तु तब कहेउ भवानी ।। भावार्थ:- हे नाथ! मुझे अत्यंत सुख देने वाली अपनी निश्चल भक्ति कृपा कर के दीजिए ।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-176

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सो सब तव प्रताप रघुराई, नाथ न कछू मोरि प्रभुताई ।। भावार्थ:- यह सब तो हे रघुनाथ जी, आप ही का प्रताप है । हे नाथ! इसमें मेरी प्रभुता (बड़ाई) कुछ भी नहीं है ।।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-175

जय श्री राधे कृष्ण ……. "साखामृग कै बड़ि मनुसाई, साखा तें साखा पर जाई, नाघि सिंधु हाटकपुर जारा, निसिचर गन बधि बिपिन उजारा ।। भावार्थ:- बंदर का बस यही पुरुषार्थ है कि वह एक डाल से दूसरी डाल पर चला...

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