खरगोश और लोमड़ी- सर्टिफिकेट
खरगोश और लोमड़ी- सर्टिफिकेट एक दिन जंगल में एक लोमड़ी ने एक खरगोश को पकड़ लिया। वह उसे खाने ही जा रही रही थी, सुबह का नाश्ता ही करने की तैयारी थी की खरगोश ने कहा, “रुको”! तुम लोमड़ी हो,...
खरगोश और लोमड़ी- सर्टिफिकेट एक दिन जंगल में एक लोमड़ी ने एक खरगोश को पकड़ लिया। वह उसे खाने ही जा रही रही थी, सुबह का नाश्ता ही करने की तैयारी थी की खरगोश ने कहा, “रुको”! तुम लोमड़ी हो,...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अजर अमर गुणनिधि सुत होहू, करहुँ बहुत रघुनायक छोहू, करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना, निर्भर प्रेम मगन हनुमाना….!! भावार्थ:- हे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापे से रहित ), अमर और गुणों के खजाने होओ। श्री...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "मन सन्तोष सुनत कपि बानी, भगति प्रताप तेज बल सानी, आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना, होहु तात बल सील निधाना…..!! भावार्थ:- भक्ति, प्रताप, तेज और बल से सनी हुई हनुमान जी की वाणी सुन कर सीता...
निर्धन का सम्मान एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके सामने प्रकट...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सीता मन भरोस तब भयऊ, पुनि लघु रुप पवनसुत लयऊ…..!! भावार्थ:- तब (उसे देखकर) सीता जी के मन में विश्वास हुआ। हनुमान जी ने फिर छोटा रुप धारण कर लिया….!! सुनु माता साखामृग नहिं बल...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "मोरें हृदय परम संदेहा, सुनि कपि प्रगट कीन्हि निज देहा, कनक भूधराकार सरीरा, समर भयंकर अतिबल बीरा….!! भावार्थ:- अतः मेरे हृदय में बड़ा भारी संदेह होता है (कि तुम जैसे बंदर राक्षसों को कैसे जीतेंगे)।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं, तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं, हैं सुत कपि सब तुम्हहि समाना, जातुधान अति भट बलवाना….."! भावार्थ:- और राक्षसों को मार कर आप को ले जाएंगे । नारद आदि (ऋषि -...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई, प्रभु आयसु नहिं राम दोहाई, कछुक दिवस जननी धरु धीरा, कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा…..!! भावार्थ:- हे माता ! मैं आप को अभी यहां से लिवा जाउँ, पर श्री राम चंद्र...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "ठंडा पानी और गरम प्रेस कपड़ों की सिकुड़न व सलवटें निकाल देतें हैं,ऐसे ही ठंडा दिमाग और ऊर्जा से भरा हुआ दिल जीवन की सारी उलझने मिटा देते हैं….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं रघुबीर होति सुधि पाई, करते नहिं बिलम्ब रघुराई, राम बान रबि उएं जानकी, तम बरुथ कहं जातुधान की….!! भावार्थ:- श्री राम चंद्र जी ने यदि खबर पाई होती, तो वे विलम्ब न करते ।...