सुविचार-सुन्दरकाण्ड-301
जय श्री राधे कृष्ण ….. "जनकसुता रघुनाथहि दीजे, एतना कहा मोर प्रभु कीजे, जब तेहिं कहा देन बैदेही, चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही ।। भावार्थ:- जानकी जी श्री रघुनाथ जी को दे दीजिए। हे प्रभु इतना कहना मेरा कीजिए ।...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "जनकसुता रघुनाथहि दीजे, एतना कहा मोर प्रभु कीजे, जब तेहिं कहा देन बैदेही, चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही ।। भावार्थ:- जानकी जी श्री रघुनाथ जी को दे दीजिए। हे प्रभु इतना कहना मेरा कीजिए ।...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "अति कोमल रघुबीर सुभाऊ, जद्यपि अखिल लोक कर राऊ, मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही, उर अपराध न एकउ धरिही ।। भावार्थ:- यद्यपि श्री रघुवीर समस्त लोकों के स्वामी हैं, पर उन का स्वभाव अत्यंत...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह सुक नाथ सत्य सब बानी, समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी, सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा, नाथ राम सन तजहु बिरोधा ।। भावार्थ:- शुक (दूत) ने कहा - हे नाथ! अभिमानी स्वभाव को छोड़ कर (इस...
वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत सभय मन मुख मुसकाई, कहत दसानन सबहि सुनाई, भूमि परा कर गहत अकासा, लघु तापस कर बाग बिलासा ।। भावार्थ:- पत्रिका सुनते ही रावण मन में भयभीत हो गया, परंतु मुख से (ऊपर से)...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस, राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस ।। भावार्थ:- (पत्रिका में लिखा था) अरे मूर्ख ! केवल बातों से ही मन को रिझा कर अपने कुल...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "*रामानुज दीन्हीं यह पाती, नाथ बचाइ जुडा़वहु छाती, बिहसि बाम कर लिन्हीं रावन, सचिव बोलि सठ लाग बचावन ।। भावार्थ:- (और कहा) श्री राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण ने यह पत्रिका दी है ।...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सचिव सभीत बिभीषन जाकें, बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें, सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी, समय बिचारि पत्रिका काढ़ी ।। भावार्थ:- जिसके विभीषण जैसा डरपोक मंत्री हो, उस के लिए संसार में विजय और विभूति...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सहज भीरु कर बचन दृढा़ई, सागर सन ठानी मचलाई, मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई, रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई ।। भावार्थ:- स्वाभाविक ही डरपोक विभीषण के वचन को प्रमाण करके उन्होंने समुद्र से मचलना...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तासु बचन सुनि सागर पाहीं, मागत पंथ कृपा मन माहीं, सुनत बचन बिहसा दससीसा, जौं असि मति सहाय कृत कीसा ।। भावार्थ:- उनके (आपके भाई) के वचन सुन कर वे (श्री राम जी) समुद्र से...