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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-53

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सीता तैं मम कृत अपमाना, कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना, नाहिं त सपदि मानु मम बानी, सुमुखि होति न त जीवन हानी…..!! भावार्थ:- सीता! तूने मेरा अपमान किया है। मैं तेरा सिर इस कठोर कृपाण...

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केवट प्रसंग : केवट का प्रेम और गंगा पार जाना

केवट प्रसंग : केवट का प्रेम और गंगा पार जाना रामायण में वर्णित हर एक घटना अपने आप में मानव जाति के लिए मार्गदर्शन मिलता है | लेकिन कुछ घटनाये ऐसी हैं जिसे हम बार बार पढते हैं फिर भी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-52

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सठ सूने हरि आनेहि मोही, अधम निलज्ज लाज नहिं तोही….!! भावार्थ:- रे पापी ! तू मुझे सूने में हर लाया है । रे अधम ! निर्लज्ज ! तुझे लज्जा नहीं आती ?…..।। आपुहि सुनि खद्योत...

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‘राम- राम’- सौभाग्य

'राम- राम'- सौभाग्य एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए जब वे स्नान करके बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की उनकी धनुष की...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. " कर्म करने पर तो हार या जीत कुछ भी मिल सकती है किन्तु कर्म ना करने पर केवल हार ही मिलती है पुरुषार्थी के पुरुषार्थ के आगे तो भाग्य भी विवश हो कर फल...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-51

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुन दसमुख खद्योत प्रकासा, कबहु कि नलिनी करइ बिकासा, अस मन समुझु कहति जानकी, खल सुधि नहिं रघुबीर बान की….!! भावार्थ:- हे दसमुख! सुन, जुगुनू के प्रकाश से कभी कमलिनी खिल सकती है ? जानकी...

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प्रेम कि पराकाष्ठा- नाच उठे बजरंगी

प्रेम कि पराकाष्ठा- नाच उठे बजरंगी एक दिन हनुमानजी जब सीता जी की शरण में आए, नैनों में जल भरा हुआ है बैठ गए शीश झुकाए, सीता जी ने पूछा उनसे कहो लाडले बात क्या है, किस कारण ये छाई...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-50

जय श्री राधे कृष्ण ……. "तव अनुचरीं करउँ पन मोरा, एक बार बिलोकु मम ओरा, तृन धरि ओट कहति बैदेही, सुमिरि अवधपति परम सनेही……!! भावार्थ:- मैं तुम्हारी दासी बना दूंगा । यह मेरा प्रण है। तुम एक बार मेरी ओर...

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