भय
भय आदरणीय हमारे बंधुओं जी अधिकतर हम अपने घर की सबसे ऊपर छत पर खड़े हो जाते है और नीचे देखते है हमे भय लगता है क्यों जी सही कहा हमने कैसा भय ?.....जैसे हमारे मकान की जड़े यानि नींव...
भय आदरणीय हमारे बंधुओं जी अधिकतर हम अपने घर की सबसे ऊपर छत पर खड़े हो जाते है और नीचे देखते है हमे भय लगता है क्यों जी सही कहा हमने कैसा भय ?.....जैसे हमारे मकान की जड़े यानि नींव...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे, तेहि पर बांधेउ तनय तुम्हारे, मोहि न कछु बांधे कइ लाजा, कीन्ह चहउँ निज प्रभु कर काजा ।। भावार्थ:- तब जिन्होंने मुझे मारा, उन को मैंने भी मारा ।...
परमात्मा हर जगह मौजूद है एक प्रसिद्ध साधवी हुई हैं! जवानी में वह बहुत ही खूबसूरत थी। एक बार चोर उसे उठाकर ले गए और एक वेश्या के कोठे पर ले जाकर उसे बेच दिया। अब उसे वही कार्य करना...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "खायउँ फल प्रभु लागी भूंखा, कपि स्वभाव तें तोरेउँ रूखा, सब के देह परम प्रिय स्वामी, मारहिं मोहि कुमारग गामी ।। भावार्थ:- हे (राक्षसों के) स्वामी ! मुझे भूख लगी थी, (इसलिए) मैंने फल खाए...
आनंद में जीना सीखें हमें अभाव में भी खुश रहना आना चाहिए क्योंकि जिसको शिकायत करने की आदत पड़ जाए तो सब-कुछ पाने के बाद भी उसका जीवन शिकायतों से ही भरा रहता है। जीवन क्षणभंगुर है पर इसको क्षणभंगुर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई, सहसबाहु सन परी लराई, समर बालि सन करि जसु पावा, सुन कपि बचन बिहसि बिहरावा ।। भावार्थ:- मैं तुम्हारी प्रभुता को खूब जानता हूँ, सहस्त्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई हुईं थी और...
खोटे सिक्के सत्य घटना...एक परिचित हैं उन्होंने अपनी बेटी के लिए वर और घर खोजा....ग्रामीण परिवार है तो जमीन जायजाद आदि ठीक ठाक और लड़का भी जमा सो ब्याह पक्का कर दिया...रोके के लिए कुछ करीबी व्यवहारी रिश्तेदार साथ ले...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली, बधे सकल अतुलित बलसाली!! भावार्थ:- जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालि को मार डाला, जो सब के सब अतुलनीय बलवान थे ।। जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि, तासु...
दुःख ईश्वर का प्रसाद है.. जब भगवान सृष्टि की रचना कर रहे तो उन्होंने जीव को कहा कि तुम्हे मृतलोक जाना पड़ेगा,मैं सृष्टि की रचना करने जा रहा हूँ…..ये सुन जीव की आँखों मे आंसू आ गए.वो बोला प्रभु कुछ...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता, तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता, हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा, तेहि समेत नृप दल मद गंजा ।। भावार्थ:- जो देवताओं की रक्षा के लिए नाना प्रकार की देह धारण करते...