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वाल्मीकि रामायण भाग 15

वाल्मीकि रामायण भाग 16सीता के साथ श्रीराम व लक्ष्मण अब अपने पिता का दर्शन करने के लिए गए। उन दोनों भाइयों के धनुष व अन्य आयुध लेकर दो सेवक भी उनके साथ-साथ चल रहे थे। उन आयुधों को फूल-मालाओं से...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-301

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जनकसुता रघुनाथहि दीजे, एतना कहा मोर प्रभु कीजे, जब तेहिं कहा देन बैदेही, चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही ।। भावार्थ:- जानकी जी श्री रघुनाथ जी को दे दीजिए। हे प्रभु इतना कहना मेरा कीजिए ।...

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वाल्मीकि रामायण भाग 15

वाल्मीकि रामायण भाग 14माता कैकेयी के कठोर वचन सुनकर भी श्रीराम व्यथित नहीं हुए। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा! मैं महाराज की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए आज ही वन को चला जाऊँगा। मेरे मन में केवल इतना ही दुःख है...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-300

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अति कोमल रघुबीर सुभाऊ, जद्यपि अखिल लोक कर राऊ, मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही, उर अपराध न एकउ धरिही ।। भावार्थ:- यद्यपि श्री रघुवीर समस्त लोकों के स्वामी हैं, पर उन का स्वभाव अत्यंत...

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वाल्मीकि रामायण भाग 14

वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-299

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह सुक नाथ सत्य सब बानी, समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी, सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा, नाथ राम सन तजहु बिरोधा ।। भावार्थ:- शुक (दूत) ने कहा - हे नाथ! अभिमानी स्वभाव को छोड़ कर (इस...

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वाल्मीकि रामायण भाग 13

वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-298

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत सभय मन मुख मुसकाई, कहत दसानन सबहि सुनाई, भूमि परा कर गहत अकासा, लघु तापस कर बाग बिलासा ।। भावार्थ:- पत्रिका सुनते ही रावण मन में भयभीत हो गया, परंतु मुख से (ऊपर से)...

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वाल्मीकि रामायण भाग 12

वाल्मीकि रामायण भाग 12 वहाँ पास ही दूसरी छत पर उसने श्रीराम की धाय(धाय अर्थात माता) को देखा। उसका मुख प्रसन्नता से खिला हुआ था। उसने पीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी। उसे देखकर मन्थरा ने पूछा, “धाय!...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-297

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस, राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस ।। भावार्थ:- (पत्रिका में लिखा था) अरे मूर्ख ! केवल बातों से ही मन को रिझा कर अपने कुल...

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