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वाल्मीकि रामायण -भाग 31

वाल्मीकि रामायण -भाग 31 जटायु की यह दशा देखकर सीता विलाप करने लगीं और अपनी रक्षा के लिए पुनः राम-लक्ष्मण को पुकारने लगीं। रावण का पूरा शरीर कोयले जैसे काला था, जो युद्ध और क्रोध के कारण अब और भी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-316

जय श्री राधे कृष्ण ….. "मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई, करिहउँ बल अनुमान सहाई, एहिं बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ, जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ ।। भावार्थ:- मैं भी प्रभु की प्रभुता को हृदय में धारण कर अपने बल...

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वाल्मीकि रामायण -भाग 30

वाल्मीकि रामायण -भाग 30 दण्डकारण्य में पहुँचकर रावण और मारीच ने श्रीराम के आश्रम को देखा। तब मारीच का हाथ पकड़कर रावण बोला, “मित्र! यह केले के वृक्षों से घिरा हुआ राम का आश्रम दिखाई दे रहा है। अब तुम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-315

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ नील नल कपि द्वौ भाई, लरिकाईं रिषि आसिष पाई, तिन्ह कें परस किएँ गिरि भारे, तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे ।। भावार्थ:- (समुद्र ने कहा), हे नाथ ! नील और नल दो वानर भाई हैं।...

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वाल्मीकि रामायण -भाग 29

वाल्मीकि रामायण -भाग 29 मारीच के पूछने पर रावण ने अपना मंतव्य बताया, “तात मारीच! मैं इस समय बहुत दुःखी हूँ और केवल तुम ही मुझे सहारा दे सकते हो।” “मेरा भाई खर, महाबाहु दूषण, मेरी बहन शूर्पणखा, मांसभोजी राक्षस...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-314

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ, जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ ।। भावार्थ:- समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुन कर कृपालु श्री राम जी ने मुस्कुरा कर कहा - हे...

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वाल्मीकि रामायण -भाग 28

वाल्मीकि रामायण -भाग 28 पंचवटी में जब शूर्पणखा ने देखा कि श्रीराम ने उन चौदह हजार राक्षसों के साथ-साथ खर, दूषण और त्रिशिरा को भी युद्ध में मार डाला है, तो वह बड़े शोक के साथ चीत्कार करने लगी। श्रीराम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-313

जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई, उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई, प्रभु आग्या अपेल श्रुति गाई, करौं सो बेगि जो तुम्हहि सोहाई ।। भावार्थ:- प्रभु के प्रताप से मैं सूख जाऊँगा और सेना पार उतर जाएगी,...

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वाल्मीकि रामायण  भाग 27

वाल्मीकि रामायण  भाग 27 राम के हाथों खर के उन चौदह राक्षसों के वध को देखकर शूर्पणखा घबरा गई। भयभीत होकर वह पुनः खर के पास भागी। पुनः उसे रोता देख खर ने उससे पूछा, “बहन! तुम्हारी इच्छा पूरी करने...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-312

जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं, मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं, ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी ।। भावार्थ:- प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा (दंड) दी, किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव)...

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