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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
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दीक्षा की महिमा

एक बार एक मानव एक सन्त के पास गया और बोला आप मुझे दीक्षा देकर मेरा उद्धार कीजिये परन्तु मेरी कुछ मांगों को पूरा करके मुझ पर कृपा करें आशा है कि आप मुझे निराश नही लौटायँगे सन्त उसके भाव...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. "ठंडा पानी और गरम प्रेस कपड़ों की सिकुड़न व सलवटें निकाल देतें हैं,ऐसे ही ठंडा दिमाग और ऊर्जा से भरा हुआ दिल जीवन की सारी उलझने मिटा देते हैं….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-87

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं रघुबीर होति सुधि पाई, करते नहिं बिलम्ब रघुराई, राम बान रबि उएं जानकी, तम बरुथ कहं जातुधान की….!! भावार्थ:- श्री राम चंद्र जी ने यदि खबर पाई होती, तो वे विलम्ब न करते ।...

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कूल ड्यूड की प्रेम वार्ता

पीठ पर एक छोटा सा बैग, धड़ पर पिंक टी शर्ट , आंखों पर फैंसी सा चश्मा, टखनों के ऊपर तक सीमित नेवी ब्लू पतलून और नीचे लॉफर शूज पहने स्पाइक हेयरकट वाला वो 18 -19 साल का कूल ड्यूड...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. "परिस्थिति कुछ भी हो, डट कर खड़े रहना चाहिए। सही समय आने पर खट्टी कैरी भी मीठा आम बन ही जाती है…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-86

जय श्री राधे कृष्ण ……. "निसिचर निकर पतंग सम रघुपति बान कृसानु, जननी हृदयँ धीर धरु जरे निसाचर जानु……!! भावार्थ:- राक्षसों के समूह पतंगों के समान और श्री रघुनाथ जी के बाण अग्नि के समान हैं। हे माता! हृदय में...

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एक बार फिर अयोध्या बसी है…

ईसा से लगभग सौ वर्ष पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य अयोध्या पहुँचे थे। तब तक अयोध्या उजड़ चुकी थी।  यहाँ उनकी भेंट तीर्थराज प्रयाग से हुई।  तीर्थराज ने उन्हें अयोध्या और सरयू के बारे में बताया। विक्रमादित्य ने अपनी उलझन...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. "गलत व गलती में बहुत छोटा फर्क होता है। गलत सदा गलत नीयत से ही संभव होता है जबकि गलती सदा भूलवश होती है इसलिए गलतियां तो कीजिये पर गलत किसी के साथ मत कीजिये….!!...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-85

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कह कपि हृदयँ धीर धरु माता, सुमिरु राम सेवक सुखदाता, उर आनहु रघुपति प्रभुताई, सुनि मन बचन तजहु कदराई….!! भावार्थ:- हनुमान जी ने कहा- हे माता ! हृदय में धैर्य धारण करो और सेवकों को...

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अयोध्या आंदोलन के हनुमान-12 – महंत अवैद्यनाथ

अयोध्या आंदोलन के हनुमान-12 – महंत अवैद्यनाथ महंत अवैद्यनाथ का जन्म 28 मई 1921 को महंत अवैद्यनाथ जी का जन्म ग्राम काण्डी, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में श्री राय सिंह बिष्ट के घर हुआ था। आपके बचपन का नाम श्री कृपाल...

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