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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-85

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जय श्री राधे कृष्ण …….

कह कपि हृदयँ धीर धरु माता, सुमिरु राम सेवक सुखदाता, उर आनहु रघुपति प्रभुताई, सुनि मन बचन तजहु कदराई….!!

भावार्थ:- हनुमान जी ने कहा- हे माता ! हृदय में धैर्य धारण करो और सेवकों को सुख देने वाले श्री राम जी का स्मरण करो। श्री रघुनाथ जी की प्रभुता को हृदय में लाओ और मेरे वचन सुन कर कायरता छोड़ दो….!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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