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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Stories

सुखी जीवन का मूल मंत्र- सहनशीलता

सुखी जीवन का मूल मंत्र- सहनशीलता जापान के सम्राट यामातो का एक राज्य मंत्री था--- ओ-चो-सान…..उसका परिवार सौहार्द्रता  के लिए बड़ा प्रसिद्ध था……यद्यपि उसके परिवार में लगभग एक हज़ार  सदस्य थे,,,, पर उसके बीच एकता का अटूट संबंध स्थापित था….सभी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-42

जय श्री राधे कृष्ण ……. अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर, कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर.. !! भावार्थ:- हे सखा! सुनिये, मैं ऐसा अधम हूँ, पर श्री राम चन्द्र जी ने तो मुझ पर भी कृपा...

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हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़े

हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़े !  गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए,राजा सगर फिर अंशुमान फिर दिलीप जी ने तपस्या की और वो असफल हुएं तब श्री दिलीप जी के...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-41

जय श्री राधे कृष्ण ……. कहहु कवन मैं परम कुलीना, कपि चंचल सबहीं बिधि हीना, प्रात लेइ जो नाम हमारा, तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा….!! भावार्थ:- भला कहिये, मै ही कौन बड़ा कुलीन हूँ ? (जाति का) चंचल वानर...

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तप का प्रभाव

तप का प्रभाव एक बार पृथ्वी पर जल-वृष्टि न होने के कारण चारों ओर अकाल फैला हुआ था| सरिता, ताल-तलैया और सरोवर सूख गए थे । कुओं में भी पानी नहीं रह गया था । कहीं भी हरियाली देखने को...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. *पिता कभी नहीं कहते कि मेरे पास पैसे नहीं है और मांँ कभी नहीं कहती कि आज मेरी तबियत खराब है बस इन्हीं दो झूठ की वजह से दुनियां इतनी सुंदर बनीं हुई है…!! सुप्रभात...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-40

जय श्री राधे कृष्ण ……. जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा, तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा, सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती, करहिं सदा सेवक पर प्रीती….!! भावार्थ:- जब श्री रघुवीर ने कृपा की है, तभी तो आपने मुझे हठ करके (अपनी...

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चरण स्पर्श

चरण स्पर्श चरण स्पर्श करने का वैज्ञानिक रहस्य जान जाओगे तो प्रतिदिन अपने बच्चों को यह सीख दोंगे। अपने से बड़ों का अभिवादन करने के लिए चरण छूने की परंपरा सदियों से रही है। भारतीय संस्कृति में अपने से बड़े...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-39

जय श्री राधे कृष्ण ……. तामस तनु कछु साधन नाहीं, प्रीति न पद सरोज मन माहीं, अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरि कृपा मिलहि नहि संता…..!! भावार्थ:- मेरा तामसी (राक्षस) शरीर होने से साधन तो कुछ बनता नहीं, और...

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