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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-12

जय श्री राधे कृष्ण ……. राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान, आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान…..!! भावार्थ:- तुम श्री रामचंद्र जी का सब कार्य करोगे क्योंकि तुम बल -बुद्धि के भंडार हो। यह आशीर्वाद देकर वह...

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माँ का आँचल

"मां का आँचल" "हे भगवान! दो महीने के लिए मुझे सहनशक्ति देना, रात - दिन की रोका टोकी और जली कटी सुनने की हिम्मत देना"… पति हिमांशु के साथ गांव से आई अपनी रौबीली सास और ससुर को देखकर निशा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-11

जय श्री राधे कृष्ण ……. बदन पइठि पुनि बाहेर आवा, मागा बिदा ताहि सिरु नावा, मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा, बुधि बल मरमु तोर मैं पावा…!! भावार्थ:- और वे उसके मुख में घुसकर (तुरंत) फिर बाहर निकल आए और उसे...

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भगवान कहाँ हैं ? कौन हैं ? किसने देखा है ?

भगवान कहाँ हैं ? कौन हैं ? किसने देखा है ? . मैं कईं दिनों से बेरोजगार था, एक एक रूपये की कीमत जैसे करोड़ो लग रही थी, इस उठापटक में था कि कहीं नौकरी लग जाए।  आज एक इंटरव्यू...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-10

जय श्री राधे कृष्ण ……. जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा, तासु दून कपि रूप देखावा, सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा, अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा…..!! भावार्थ:- जैसे-जैसे सुरसा मुख का विस्तार बढ़ाती थी, हनुमान जी उसका दूना रूप दिखलाते थे...

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ईर्ष्या

ईर्ष्या बहुत पहले की बात है, एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। उसके पास एक बहुत छोटा सा खेत था जिसमें कुछ सब्जियां उगा कर वह अपना व अपने परिवार का पेट पालता था। गरीबी के कारण उसके...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-9

जय श्री राधे कृष्ण ……. जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा,/कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा, सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ, तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ….!! भावार्थ:- उसने योजन भर (चार कोस में) मुंह फैलाया । तब हनुमान जी ने अपने शरीर को...

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कर्मो का लेखा – जोखा

कर्मो का लेखा - जोखा बेटा बन कर,बेटी बनकर,दामाद बनकर,और बहु बनकर कौन आता है ? जिसका तुम्हारे साथ कर्मों का लेना देना होता है। लेना देना नहीं होगा तो नहीं आयेगा। एक फौजी था। उसके मां बाप नहीं थे।...

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