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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-164

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अवगुन एक मोर मैं माना, बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना, नाथ सो नयनन्हि को अपराधा, निसरत प्रान करहिं हठि बाधा ।। भावार्थ:- हाँ, एक दोष मैं अपना अवश्य मानती हूँ कि आपका वियोग होते ही...

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संघर्ष जरूरी है

संघर्ष जरूरी है नीति शास्त्र कहते हैं कि अधम श्रेणी के मनुष्य- कठिनाइयों के भय से किसी उत्तम कार्य को प्रारंभ ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के मनुष्य - कार्य को तो प्रारंभ करते हैं पर विघ्नों को आते देख...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-163

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना, दीन बन्धु प्रनतारति हरना, मन क्रम बचन चरन अनुरागी, केहिं अपराध नाथ हौं त्यागी ।। भावार्थ:- छोटे भाई समेत प्रभु के चरण पकड़ना (और कहना कि) आप दीनबन्धु हैं, शरणागत...

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अनमोल सुख

अनमोल सुख हम सुख के पीछे भाग रहे है पर सुख और कहीं नहीं हमारे अंदर ही छुपा है एक आदमी के पास बहुत धन था। इतना कि अब और धन पाने से कुछ सार नहीं था।जितना था, उसका भी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-162

जय श्री राधे कृष्ण ……. "चलत मोहि चूड़ामणि दीन्ही, रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही, नाथ जुगल लोचन भरि बारी, बचन कहे कछु जनक कुमारी ।। भावार्थ:- चलते समय उन्होंने मुझे चूड़ामणि (उतार कर) दी । श्री रघुनाथ जी ने उसे...

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गलंतिका-शिवलिंग के ऊपर बांधी जाने वाली मटकी

गलंतिका-शिवलिंग के ऊपर बांधी जाने वाली मटकी हम कई बार शिवलिंग के ऊपर एक मटकी बंधी हुई देखते हैं, जिसमें से बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है। ये दृश्य अक्सर गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। इस...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-161

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट, लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ।। भावार्थ:- (हनुमान जी ने कहा), आप का नाम रात-दिन पहरा देने वाला है, आप का ध्यान ही किंवाड़ है...

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बूढ़ा पिता

बूढ़ा पिता  गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। बूढ़ा बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-160

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनत कृपानिधि मन अति भाए, पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए, कहहु तात केहि भाँति जानकी, रहति करति रच्छा स्वप्रान की ।। भावार्थ:- (वे चरित्र) सुनने पर कृपानिधि श्री रामचन्द्र जी के मन को बहुत ही...

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