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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-255

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम, ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम ।। भावार्थ:- जो सगुण (साकार) भगवान के उपासक हैं, दूसरे के हित में लगे रहते हैं, नीति और...

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तारा की वाणी

देवी तारा की वाणी सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना! उस समय अमर्षशील वाली अपने अन्तःपुर में था। उसने अपने...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-254

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अस सज्जन मम उर बस कैसें, लोभी हृदयँ बसइ धनु जैसें, तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें, धरउँ देह नहिं आन निहोरें ।। भावार्थ:- ऐसा सज्जन मेरे हृदय में कैसे बसता है, जैसे लोभी के हृदय...

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डिनर बिल का एडवांस पेमेंट

डिनर बिल का एडवांस पेमेंट एक दिन अचानक मेरी पत्नी मुझसे बोली, "सुनो, अगर मैं तुम्हें किसी और के साथ डिनर और फिल्म के लिए बाहर जाने को कहूं तो तुम क्या कहोगे?" मैं बोला, "मैं कहूंगा कि अब तुम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-253

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सब कै ममता ताग बटोरी, मम पद मनहि बांध बरि डोरी, समदरसी इच्छा कछु नाहीं, हरष सोक भय नहिं मन माहीं ।। भावार्थ:- इन सब के ममत्व रुपी तागों को बटोर कर और उन सब...

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दूसरों का अमंगल चाहने में अपना अमंगल पहले होता है

दूसरों का अमंगल चाहने में अपना अमंगल पहले होता है 'देवराज इन्द्र तथा देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करके महाशैव महर्षि दधीचि ने देह त्याग किया। उनकी अस्थियाँ लेकर विश्वकर्मा ने वज्र बनाया। उसी वज्र से अजेयप्राय वृत्रासुर को इन्द्र ने...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-252

जय श्री राधे कृष्ण ….. "तजि मद मोह कपट छल नाना, करउँ सद्य तेहि साधु समाना, जननी जनक बंधु सुत दारा, तनु धनु भवन सुहृद परिवारा ।। भावार्थ:- और मद, मोह तथा नाना प्रकार के छल कपट त्याग दे तो...

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जीवन का रख रखाव

जीवन का रख रखाव एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने दुःख से दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं और...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-251

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनहु सखा निज कहउँ सुभाऊ, जान भुसुंडि संभु गिरिजाऊ, जौं नर होइ चराचर द्रोही, आवै सभय सरन तकि मोही ।। भावार्थ:- (श्री राम जी ने कहा) हे सखा! सुनो, मैं तुम्हें अपना स्वभाव कहता हूँ,...

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एक एहसास

एक एहसास एक प्रेमी-युगल शादी से पहले काफी हँसी-मजाक और नोक-झोंक किया करते थे। शादी के बाद उनमें छोटी छोटी बातो पे झगड़े होने लगे। एक दिन उनकी शादी कि सालगिरह थी,पर पत्नी ने कुछ नहीं बोला वो पति का...

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