वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 9
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 9 मिथिला में विवाह की बातचीत तय हो ही रही थी कि भरत के मामा युधाजित भी वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने दशरथ जी को प्रणाम करके कहा, “महाराज! केकयनरेश ने आपका कुशल समाचार पूछा है।...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 9 मिथिला में विवाह की बातचीत तय हो ही रही थी कि भरत के मामा युधाजित भी वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने दशरथ जी को प्रणाम करके कहा, “महाराज! केकयनरेश ने आपका कुशल समाचार पूछा है।...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सहज भीरु कर बचन दृढा़ई, सागर सन ठानी मचलाई, मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई, रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई ।। भावार्थ:- स्वाभाविक ही डरपोक विभीषण के वचन को प्रमाण करके उन्होंने समुद्र से मचलना...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 8 जनक जी की बात सुनकर महर्षि विश्वामित्र बोले, “राजन्! आप श्रीराम को अपना वह धनुष दिखाएं तब राजा जनक ने अपने मंत्रियों को आज्ञा दी, “चन्दन व मालाओं से सुशोभित वह दिव्य धनुष यहाँ...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तासु बचन सुनि सागर पाहीं, मागत पंथ कृपा मन माहीं, सुनत बचन बिहसा दससीसा, जौं असि मति सहाय कृत कीसा ।। भावार्थ:- उनके (आपके भाई) के वचन सुन कर वे (श्री राम जी) समुद्र से...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 7 श्रीराम व लक्ष्मण को साथ ले महर्षि विश्वामित्र ने उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान किया। मुनिवर के साथ जाने वाले ब्रह्मवादी महर्षियों की सौ गाड़ियाँ भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं। बहुत दूर तक का...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "राम तेज बल बुधि बिपुलाई, सेष सहस सत सकहिं न गाई, सक सर एक सोषि सत सागर, तव भ्रातहिं पूँछेउ नय नागर ।। भावार्थ:- श्री रामचंद्र जी के तेज (सामर्थ्य) बल और बुद्धि की अधिकता...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 6 उन तीनों ने वह रात्रि ताटका वन में व्यतीत की। अगले दिन प्रातःकाल महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम से कहा, "महायशस्वी राजकुमार! ताटका वध के कारण मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ। आज मैं बड़ी...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम, रावन काल कोटि कहुँ जीति सकहिं संग्राम ।। भावार्थ :- सब वानर - भालू सहज ही शूरवीर हैं, फिर उनके सिर पर प्रभु (सर्वेश्वर) श्री...
वाल्मीकि रामायण - अयोध्या काण्ड- भाग 5 दशरथ जी ने श्रीराम को प्रसन्नतापूर्वक महर्षि विश्वामित्र को सौंप दिया। आगे-आगे विश्वामित्र, उनके पीछे श्रीराम व उनके पीछे सुमित्रानंदन लक्ष्मण चल पड़े। उन दोनों भाइयों के हाथों में धनुष थे और उन्होंने...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "मर्दि गर्द मिलवहिं दससीसा, ऐसहि बचन कहहिं सब कीसा, गर्जहिं तर्जहिं सहज असंका, मानहुँ ग्रसन चहत हहिं लंका ।। भावार्थ:- और रावण को मसल कर धूल में मिला देंगे। सब वानर ऐसे ही वचन कह...