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चाँद से पहले तुम

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चाँद से पहले तुम

एक छोटे से घर में रहने वाली नेहा ने अपने पति रोहित के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। सुबह से भूखी-प्यासी नेहा बस शाम होने का इंतज़ार कर रही थी। लेकिन उस दिन रोहित को ऑफिस से लौटने में बहुत देर हो गई। नेहा बार-बार दरवाज़े की तरफ देखती और उसकी आँखों में आँसू आने लगते।

तभी दरवाज़ा खुला। रोहित आया, लेकिन उसके हाथ में कोई महँगा तोहफा नहीं था। उसके हाथ में एक छोटा-सा डिब्बा था। नेहा ने नाराज़ होकर कहा, “आपको पता भी है, मैं कब से आपका इंतज़ार कर रही हूँ?”

रोहित ने मुस्कुराकर उसका हाथ थामा और बोला—“माफ़ करना नेहा… रास्ते में तुम्हारे लिए कुछ लेने रुका था। लेकिन फिर लगा, तुम्हें तोहफे से ज़्यादा मेरी ज़रूरत है।”

उसने डिब्बा खोला। उसमें नेहा की माँ की पुरानी तस्वीर थी, जिसे रोहित ने फ्रेम करवाया था। नेहा की आँखों से आँसू बहने लगे।

चाँद निकल आया। नेहा ने छलनी से पहले चाँद को देखा, फिर रोहित का चेहरा।

रोहित ने उसे पानी पिलाते हुए कहा—“तुम हर साल मेरी लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हो… लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत वजह तो तुम खुद हो।”

नेहा ने रोहित को गले लगा लिया। उस रात चाँद आसमान में चमक रहा था, लेकिन उन दोनों के लिए सबसे खूबसूरत रोशनी उनके दिलों में थी।

कहानी की सीख: सच्चा प्यार महँगे तोहफों में नहीं, एक-दूसरे के एहसासों को समझने में होता है। ❤️

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जय श्रीराम

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Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
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