गंगा मैया कहाँ से लाओगे
एक बार अमेरिका में रहने वाले उनके एक प्रशंसक ने उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ को अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और वहाँ शहनाई स्कूल खोलने का शानदार प्रस्ताव दिया।
उन्हें मनाने के लिए उसने कहा-“आपके लिए अमेरिका में बिल्कुल बनारस जैसा माहौल बना देंगे। मंदिरों की प्रतिकृतियाँ भी बनवा देंगे।”
उस्ताद ने मुस्कुराकर पूछा-“बनारस तो बसा दोगे… मंदिर भी बना दोगे, लेकिन मेरी गंगा मैया को कहाँ से लाओगे?”
बस, यही जवाब उनके दिल का पता बता गया।
जिस कलाकार की शहनाई बनारस की गलियों और गंगा की लहरों में साँस लेती थी, उसके लिए दुनिया की कोई भी चमक अपनी मिट्टी का विकल्प नहीं हो सकती थी।
जय श्रीराम