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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-260

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जय श्री राधे कृष्ण …..

“जदपि सखा तव इच्छा नाहीं, मोर दरसु अमोघ जग माहीं, अस कहि राम तिलक तेहि सारा, सुमन बृष्टि नभ भई अपारा ।।

भावार्थ:– (और कहा) हे सखा! यद्यपि तुम्हारी इच्छा नहीं है, पर जगत में मेरा दर्शन अमोघ है (वह निष्फल नहीं जाता) । ऐसा कह कर श्री राम जी ने उनको राजतिलक कर दिया। आकाश से पुष्पों की अपार वृष्टि हुई….!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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