जय श्री राधे कृष्ण …..
“जदपि सखा तव इच्छा नाहीं, मोर दरसु अमोघ जग माहीं, अस कहि राम तिलक तेहि सारा, सुमन बृष्टि नभ भई अपारा ।।
भावार्थ:– (और कहा) हे सखा! यद्यपि तुम्हारी इच्छा नहीं है, पर जगत में मेरा दर्शन अमोघ है (वह निष्फल नहीं जाता) । ऐसा कह कर श्री राम जी ने उनको राजतिलक कर दिया। आकाश से पुष्पों की अपार वृष्टि हुई….!
सुप्रभात
आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..
