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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-189

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जय श्री राधे कृष्ण …….

“एहि बिधि जाइ कृपानिधि उतरे सागर तीर, जहं तहं लागे खान फल भालु बिपुल कपि बीर ।।

भावार्थ:- इस प्रकार कृपा निधान श्री राम जी समुद्र तट पर जा उतरे । अनेकों रीछ – वानर वीर जहाँ – तहाँ फल खाने लगे……!!

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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