जय श्री राधे कृष्ण …….
“सीता कै अति बिपति बिसाला, बिनहिं कहें भलि दीनदयाला ।।
भावार्थ:- सीता जी की विपत्ति बहुत बड़ी है । हे दीनदयालु! वह बिना कही ही अच्छी है (कहने से आपको बडा़ क्लेश होगा) ।।
निमिष निमिष करुणानिधि जाहिं कलप सम बीति ।
बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति!!
भावार्थ:- हे करुणानिधान ! उनका एक एक पल कल्प के समान बीतता है । अत: हे प्रभु! तुरंत चलिए और अपनी भुजाओं के बल से दुष्टों के दल को जीत कर सीता जी को ले आइये……!!
दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।
सुप्रभात
आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..
