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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-111

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जय श्री राधे कृष्ण …….

“कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद, सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद…..।।

भावार्थ:- हनुमान जी को देख कर रावण दुर्वचन कहता हुआ खूब हंसा । फिर पुत्र वध का स्मरण किया तो उस के हृदय में विषाद उत्पन्न हो गया…….!!

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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