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मूर्खा की संगत से नुकसान

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मूर्खा की संगत से नुकसान

गुरु चेला भिक्षा माँग रहे थे। लोग उन्हें भिक्षा में सोना चांदी दे रहे थे। ऐसे हालात देखकर गुरु ने चेले से कहा” यहां की जनता और राजा महामूर्ख है। हमें ऐसे राज्य में नही रहना चाहिए। मगर चेला लालची था। वह नहीं माना गुरुजी उस राज्य को छोड़ कर चले गए।

कुछ दिनों बाद राज्य में एक व्यक्ति को फांसी दी जा रही थी। मगर उस व्यक्ति की गर्दन फांसी के फंदे के नाप की नहीं थी। राजा ने ऐलान किया कि उस व्यक्ति को खोज कर फांसी दे दो। जिसकी गर्दन फंदे के नाप की हो संयोग से उस चेले की गर्दन नाप की निकल आई।

चेले ने फांसी से पहले अपनी अंतिम इच्छा में गुरु से मिलने की प्रार्थना की। जब गुरु को बुलाया गया तब शिष्य उनके पैरों में गिरता हुआ बोला ” गुरुजी बचा लो” फिर गुरु के प्लान के अनुसार शिष्य और गुरु दोनों फांसी पाने के लिए लड़ने लगे।

गुरु कह रहा था मुझे फांसी दो, उधर चेला जिद कर रहा था कि वही फांसी पर चढ़ेगा। राजा ने कारण पूछा तो गुरु ने कहा ” आज ग्रह नक्षत्र श्रेष्ठ है। जो भी फांसी चढ़ेगा उसे इंद्र का सिंहासन मिलेगा। इतना सुनते ही राजा बोला ” फांसी पर मै चढूंगा।” इस तरह शिष्य बच गया और राजा को फांसी हो गई।

कहानी की सीखः मूर्दों की संगति से हमेशा दूर रहना चाहिए, वरना वह जानलेवा साबित हो सकती है!

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जय श्रीराम

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Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
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