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छाती में ज़िंदा कॉकरोच

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छाती में ज़िंदा कॉकरोच

यह सिर्फ एक वायरल खबर नहीं, बल्कि इंसानी ज़िंदगी से खिलवाड़ की खुली मिसाल है। केन्या/Kenya में एक मरीज को एक्स-रे दिखाकर डराया गया कि उसकी छाती में ज़िंदा कॉकरोच है। बिना दोबारा जांच, बिना किसी सीनियर कन्फर्मेशन सीधा फैसला सुना दिया गया। क्या अब अस्पताल डर फैलाने की फैक्ट्री बन चुके हैं?

हद तो तब हो गई जब मरीज को इलाज के नाम पर सिंगापुर /Singapore भेज दिया गया। वहां सही जांच हुई तो सच्चाई सामने आई कीड़ा मरीज के शरीर में था ही नहीं, बल्कि एक्स-रे मशीन के अंदर फंसा हुआ था! यानी गंदी मशीन, लापरवाह स्टाफ और भुगतना पड़ा मरीज को। यह गलती नहीं, सीधा अपराध है।

सोचिए, अगर वह इंसान विदेश न जा पाता तो? पूरी जिंदगी छाती में कीड़ा वाला डर लेकर जीता रहता। मानसिक यातना, आर्थिक बर्बादी और भरोसे का कत्ल — यह सब किसकी वजह से? उन डॉक्टरों और टेक्नीशियनों की, जो रिपोर्ट पढ़ने से पहले दिमाग बंद कर देते हैं।

यह घटना बताती है कि कई जगह हेल्थ सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है। मशीनों की सफाई नहीं, क्वालिटी कंट्रोल नहीं, जवाबदेही शून्य — लेकिन बिल पूरे वसूले जाते हैं। मरीज को इंसान नहीं, कमाई का साधन समझा जा रहा है। न ऑडिट, न सज़ा, न माफ़ी — बस अगला शिकार तैयार।

अब सवाल साफ है: क्या ऐसे अस्पतालों पर ताले लगेंगे? क्या जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी? या हमेशा की तरह मामला दबा दिया जाएगा? आज कॉकरोच निकला है, कल किसी की जान भी जा सकती है। यह हेल्थकेयर नहीं — यह संगठित लापरवाही है, और अगर अब भी आवाज़ नहीं उठी, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।

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जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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