सुविचार-सुन्दरकाण्ड-169
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनु कपि तोहि समान उपकारी, नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी, प्रति उपकार करौं का तोरा, सनमुख होइ न सकत मन मोरा ।। भावार्थ:- (भगवान कहने लगे) हे हनुमान! सुन तेरे समान मेरा उपकारी देवता,...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनु कपि तोहि समान उपकारी, नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी, प्रति उपकार करौं का तोरा, सनमुख होइ न सकत मन मोरा ।। भावार्थ:- (भगवान कहने लगे) हे हनुमान! सुन तेरे समान मेरा उपकारी देवता,...
परहित-सबसे बड़ा धर्म एक बार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन भ्रमण के लिए कहीं निकले थे तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षा मांगते देखा तो अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राह्मण को स्वर्ण...
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जय श्री राधे कृष्ण ……. "कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई, जब तव सुमिरन भजन न होई, केतिक बात प्रभु जातुधान की, रिपुहि जिति आनिबी जानकी ।। भावार्थ:- हनुमान जी ने कहा- हे प्रभु! विपत्ति तो वही (तभी) है जब आप...
भावुक प्रसंग -मीरा चरित्र जरूर पढ़ें मीरा को चित्तौड़ में आये कुछ मास बीत गये । गिरधर की रागसेवा नियमित चल रही है ।मीरा अपने कक्ष में बैठे गिरधरलाल की पोशाक पर मोती टाँक रही थी । कुछ ही दूरी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुन सीता दुख प्रभु सुख अयना,भरि आए जल राजिव नयना, बचन काय मन मम गति जाही,सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही ।। भावार्थ:- सीता जी का दु:ख सुन कर सुख के धाम प्रभु के कमल नेत्रों...
सुखी जीवन का रहस्य पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते थे। उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा उसके जीवन के सुखी नहीं...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सीता कै अति बिपति बिसाला, बिनहिं कहें भलि दीनदयाला ।। भावार्थ:- सीता जी की विपत्ति बहुत बड़ी है । हे दीनदयालु! वह बिना कही ही अच्छी है (कहने से आपको बडा़ क्लेश होगा) ।। निमिष...
आचरण और व्यवहार हमारा सबसे बड़ा परिचय है शेर की गर्जना सदियों पहले जैसी बनी हुई है। भैंसा आज भी हजार वर्ष पहले जैसा है। गुस्सा आता है तो वह किसी को भी मार डालता है। सांप पहले जैसे फुफकारता...