ईश्वर का न्याय
ईश्वर का न्याय एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले। गुरुजी को ज्यादा इधर- उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था। परन्तु...
ईश्वर का न्याय एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले। गुरुजी को ज्यादा इधर- उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था। परन्तु...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " मीठे हलवे की कटोरी में काजू, बादाम, सूजी तो दिखाई देते हैं पर जिससे...
यज्ञ धर्म ही है जब जामवंत लंका पहुंचे तो रावण किले के द्वार पर चरण छूने आया और बोला, पितामह...
आपका सुन्दर व्यवहार एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खड़ा कर पूछा...
योग्यता का पुरस्कार एक राजा के राज सभा में एक अनजान व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी योग्यता...
सुलोचना को श्राप एक बार लक्ष्मी माता ने शेषनाग को कसकर श्री हरि की कलाई पर बांध दिया , जिससे...