सुविचार-सुन्दरकाण्ड-24
जय श्री राधे कृष्ण ……. जानेहिं नहीं मरमु सठ मोरा, मोर अहार जहाँ लगि चोरा, मुठिका एक महा कपि हनी, रुधिर बमत धरनीं ढनमनी…..!! भावार्थ:- हे मूर्ख! तूने मेरा भेद नहीं जाना ? जहां तक (जितने) चोर हैं, वह सब...
जय श्री राधे कृष्ण ……. जानेहिं नहीं मरमु सठ मोरा, मोर अहार जहाँ लगि चोरा, मुठिका एक महा कपि हनी, रुधिर बमत धरनीं ढनमनी…..!! भावार्थ:- हे मूर्ख! तूने मेरा भेद नहीं जाना ? जहां तक (जितने) चोर हैं, वह सब...
जय श्री राधे कृष्ण ……. मसक समान रूप कपि धरी, लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी, नाम लंकिनी एक निसिचरी, सो कह...
भगवान् से क्या माँगे? भगवान् से माँगने के सम्बन्ध में एक कथा आती है कि एक बार भगवान् कृष्ण अर्जुनको...
जय श्री राधे कृष्ण ……. पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार, अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं...
एक बंधन ऐसा भी अनुज नाम था उसका....मेरे आफिस में थर्ड ग्रेड वर्कर था....मेरा तबादला अभी यहाँ हुआ था आफिसर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. " मुट्ठी दुआओं की माता-पिता ने चुपके से सिर पर छोड़ दी….खुश रहो… कहकर और...
जय श्री राधे कृष्ण ……. करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं, कहुँ महिष मानुष धेनु खर...
संत की शरण एक गांव में एक ठाकुर थे। उनके यहां एक नौकर काम करता था.. जिसके कुटुंब में बीमारी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं, नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रुप मुनि...