सीताजी का स्वयंवर
सीताजी का स्वयंवर भगवान श्रीरामचन्द्र जी जब महर्षि विश्वामित्र कि सलाह पर मिथिला नरेश राजा जनक कि राज्यसभा में धनुषयज्ञ देखने गये। उनके सौंदर्य, सौम्यता को देखकर जनकपुर के लोग मोहित थे। सभी चाहते थे कि विधि का विधान ऐसा...
सीताजी का स्वयंवर भगवान श्रीरामचन्द्र जी जब महर्षि विश्वामित्र कि सलाह पर मिथिला नरेश राजा जनक कि राज्यसभा में धनुषयज्ञ देखने गये। उनके सौंदर्य, सौम्यता को देखकर जनकपुर के लोग मोहित थे। सभी चाहते थे कि विधि का विधान ऐसा...
भगवान श्रीराम जी को कब-कब क्रोध आया? जब भी हम श्रीराम के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में उनकी एक सौम्य और शांतचित्त छवि उभर कर आती है। श्रीराम हिन्दू धर्म के सर्वाधिक संयमी और शांत चरित्रों में...
केवट प्रसंग : केवट का प्रेम और गंगा पार जाना रामायण में वर्णित हर एक घटना अपने आप में मानव जाति के लिए मार्गदर्शन मिलता है | लेकिन कुछ घटनाये ऐसी हैं जिसे हम बार बार पढते हैं फिर भी...
'राम- राम'- सौभाग्य एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए जब वे स्नान करके बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की उनकी धनुष की...
प्रेम कि पराकाष्ठा- नाच उठे बजरंगी एक दिन हनुमानजी जब सीता जी की शरण में आए, नैनों में जल भरा हुआ है बैठ गए शीश झुकाए, सीता जी ने पूछा उनसे कहो लाडले बात क्या है, किस कारण ये छाई...
चमत्कार छोटी मनु ने गुल्लक से सब सिक्के निकाले और उनको बटोर कर जेब में रख लिया, निकल पड़ी घर से - पास ही केमिस्ट की दुकान थी उसके जीने धीरे धीरे चढ़ गयी । वो काउंटर के सामने खड़े...
मानसिक भाव एक ब्राह्मण- वह एक महान भक्त था… वह मंदिर की पूजा में बहुत शानदार सेवा पेश करना चाहता था, लेकिन उसके पास धन नहीं था ! एक दिन की बात है वह एक भागवत पाठ में बैठा हुआ...
गाय का ममत्वपूर्ण व्यवहार एक बार मध्यप्रदेश के इन्दौर नगर में एक रास्ते से ‘महारानी देवी अहिल्यावाई होल्कर के पुत्र मालोजीराव’ का रथ निकला तो उनके रास्ते में हाल ही की जनी गाय का एक बछड़ा सामने आ गया। गाय...
40 बसन्त के बाद अपना कोई शौक ज़िन्दा रखे। आँखे बंद करके, फ़िल्म थ्री इडियट्स का हॉस्पिटल वाला वो सीन देखने की कोशिश करे जिसमे वो संवाद है, की 50 साल बाद, बूढ़ा होकर किसी ऐसे ही हॉस्पिटल में तु...
पण्डित देवीदीन पाण्डे 174000 लाशे गिरी थीं ...700 मुगलों को अपने हाथों से काटने वाले योद्धा……यह थे श्रीराम मंदिर रक्षक पण्डित देवीदीन पाण्डे। पंडित देवीदीन जो सनेथू गांव अयोध्या के रहने वाले थे, जिनका जन्म सर्यूपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ...