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सजा का मापदंड

बहुत समय पहले हरिशंकर नाम का एक राजा था। उसके तीन पुत्र थे और अपने उन तीनों पुत्रों में से वह किसी एक पुत्र को राजगद्दी सौंपना चाहता था। पर किसे? राजा ने एक तरकीब निकाली और उसने तीनो पुत्रों...

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अहंकार ❤️

एक मक्खी एक हाथी के ऊपर बैठ गई। हाथी को पता भी नहीं चला कि मक्खी कब बैठी। मक्खी बहुत भिनभिनाई, आवाज की, और कहा- भाई! तुझे कोई तकलीफ हो तो बता देना, या वजन मालूम पड़े तो खबर कर...

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भीतर की माँ

विधवा थी पर श्रृंगार ऐसा कर के रखती थी कि पूछो मत। बिंदी के सिवाय सब कुछ लगाती थी। पूरी कॉलोनी में उनके चर्चे थे। उनका एक बेटा भी था जो अभी नौंवी कक्षा में था । पति रेलवे में...

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पेट भरता या पैर

अटलजी जब संघ के प्रचारक थे तब नानाजी देशमुख विभाग प्रमुख थे। एकबार नानाजी देशमुख जी ने देखा कि अटलजी के पैरों में चप्पल नहीं है तब नानाजी देशमुख ने उन्हें 2 रुपये चप्पल खरीदने के लिए दिया। 2 महीने...

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सच्चा प्रायश्चित

"सुनो खुशबू .. मम्मी पापा आ रहे हैं कल, दस दिन, यही रूकेंगे, एडजस्ट कर लेना-राजेश ने खुशबू को बैड पर लेटते हुए कहा। "कोई बात नही राजेश, आने दिजिए, आपको शिकायत का कोई मौका नही मिलेगा"-खुशबू ने तुरन्त उत्तर...

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साक्षात्कार/Interview

बात बात में मां बाप का टोकना हमें अखरता है । हम भीतर ही भीतर झल्लाते है कि कब इनके टोकने की आदत से हमारा पीछा जुटेगा । लेकिन हम ये भूल जाते है कि उनके टोकने से जो संस्कार...

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अपेक्षा रहित सेवा- प्रभु की नजरों में सम्मानित

जगत से अपेक्षा रखकर की गई कोई भी सेवा एक ना एक दिन निराशा का कारण अवश्य बन जाती है। यदि जीवन में अवसर मिले तो सेवा सभी की करना मगर आशा किसी से भी मत रखना क्योंकि सेवा का...

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इकलौता चिराग -पियूष

इकलौता चिराग -पियूष पीयूष बेटा तेरे पिता तुझे बहुत याद कर रहे हैं अंतिम समय में तुझे देखना चाहते हैं एक बार आ जा बेटा....दमयंती जी करुणा विगलित स्वर में अपने इकलौते चिराग पियूष से प्रार्थना कर रहीं थीं। मां...

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छोटी-शुरूवात-बड़ी-सफलता

छोटी-शुरूवात-बड़ी-सफलताएक बार एक गांव मे निर्धन परिवार रहता था। परिवार की हालात इतनी तंगी थी कि उसके खाने पीने के भी लाले पडे हुए थे। परिवार सिर्फ तीन ही लोगों का था। पती पत्नि और बेटा । पती को कोई...

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समय रहते अपना घर बना लें

             एक निर्धन विद्वान व्यक्ति चलते चलते पड़ोसी राज्य में पहुँचा। संयोग से उस दिन वहाँ हस्तिपटबंधन समारोह था जिसमें एक हाथी की सूंड में माला देकर नगर में घुमाया जाता था। वह जिसके गले में माला डाल देता था...

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